मध्य प्रदेश के इंदौर शहर किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार परंपरागत खेती के बजाय उद्यानिकी पर ज्यादा जोर दे रही है

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के मेंमदी गांव के पायलेट प्रोजेक्ट .किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार परंपरागत खेती के बजाय उद्यानिकी पर ज्यादा जोर दे रही है


इंदौर के मेंमदी गांव में पायलट प्रोजेक्ट




भोपाल : किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार परंपरागत खेती की बजाए उद्यानिकी पर ज्यादा जोर दे रही है। सरकार किसानों को फूलों की खेती करने पर जोर दे रही है। इसके लिए प्रदेश के हर ब्लॉक में पुष्प ग्राम बनाए जाने की योजना है। इसकी शुरुआत इंदौर संभाग के सभी ब्लॉक से की जा रही है।


एक ब्लॉक में एक पुष्प ग्राम बनाया जाएगा। सरकार ने प्रयोग के तौर पर इंदौर के पास के गांव मेमदी को चुना है। मेमदी को पहला पुष्प ग्राम बनाया गया है। इस गांव के करीब दो सौ किसानों ने इस साल फूलों की ख्ेाती की है, जिसमें उनको फायदा नजर आया है।


सरकार पुष्प ग्राम बनाने के लिए अपनी नीति में भी बदलाव कर रही है। सरकार किसानों को फूलों की खेती के लिए अनुदान के साथ-साथ अन्य सुविधाएं भी देगी। किसानों के फूलों को मार्केट उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी सरकार उठाएगी। इसके लिए भी मार्केट पॉलिसी बनाई जा रही है। ये प्रयोग सफल रहा तो प्रदेश के ३१३ ब्लॉक के एक-एक गांव को पुष्प ग्राम बनाया जाएगाा।


इन फूलों को उगाया जाएगा :
फूलों की खेती करने में एक बीघा जमीन पर 30 से 35 हजार रुपए की लागत आती है। साठ दिन यानी दो महीने बाद फूल बाजार में जाने के लिए तैयार हो जाते हैं। एक बीघा जमीन पर करीब 80 हजार रुपए का उत्पादन होता है यानी लागत निकाल कर किसान को 50 हजार रुपए का मुनाफा हो जाता है।


सरकार को लगता है कि यदि तीन महीने की खेती में किसान को शुद्ध रुप से 50 हजार रुपए मिलते हैं तो ये उसकी माली हालत को सुधारने में बहुत मददगार साबित हो सकते हैं। अन्य दिनों में किसान अपनी परंपरागत खेती भी कर सकता है। मध्यप्रदेश में मुख्यतौर पर गुलाब, मोंगरा, गेंदा, चमेली जैसे फूलों की ख्ेाती प्रमुख रुप से की जाती है।


बीज से मार्केट तक सरकार का जिम्मा :
फूलों की खेती में सबसे ज्यादा समस्या बीज की होती है। बीज खराब होने के कारण कई बार किसानों का नुकसान उठाना पड़ता है। पुष्प ग्राम के लिए किसानों को फूलों का बीज सरकार ही मुहैया कराएगी। बीज की पूरी जांच परख के बाद उसको इस्तेमाल किया जाएगा। बाजार में बिकने वाले बीज पर भरोसा करके किसान बो तो देता है, लेकिन कई बार फूल ही नहीं लगते। गेंदा के हाईब्रिड बीज में आम तौर पर ये परेशानी आती है। फूल बहुत नाजुक होते हैं, इन्हें अधिक देर तक ताजा नहीं रखा जा सकता। इंदौर का फूल गुजरात, दिल्ली, मुंबई तक जाता जरूर है, लेकिन अधिक पैदावार पर सही भाव नहीं मिल पाता। गुलाब के बचे हुए फूलों का उपयोग तो गुलकंद बनाने में हो जाता है, लेकिन अन्य फूलों की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडीशन की इंदौर या आसपास व्यवस्था नहीं है। इसीलिए सरकार इनकी मार्केटिँग तक की व्यवस्था करेगी ताकि किसानों को नुकसान न उठाना पड़े। पुष्प ग्राम के पास फूल प्रोसेसिंग की यूनिट भी लगाई जाएगी।


छिंदवाड़ा,होशंगाबाद में युवा करेंगी खेती :
युवाओं को रोजगार से जोडऩे के लिए भी सरकार फूलों की खेती का सहारा लेगी। एक और मॉडल के तहत होशंगाबाद और छिंदवाड़ा में सौ-सौ एकड़ जमीन आरक्षित की गई है। जो युवा उद्यमी फूलों की खेती करना चाहते हैं उनको सरकार ये जमीन उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही उनको अन्य सुविधाएं और अनुदान भी देगी।


- ग्राम मेमदी को हमने पुष्प ग्राम के रुप में विकसित किया है, आगे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इंदौर के प्रत्येक विकासखंड के एक-एक ग्राम को पुष्पग्राम के रुप में विकसित करने जा रहे हैं। इसके बाद हम इस पूरे प्रोजेक्ट को प्रदेश भर में लागू करेंगे जिससे खेती को लाभ का धंधा बनाया जा सके और किसान की आय में वृद्धि हो।


- सचिन यादव कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री -